🏆राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 71वीं राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों का आयोजन किया
(23 सितम्बर 2025, नई दिल्ली)
71वीं राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन एक गरिमापूर्ण, प्रेरणादायक एवं संस्कृति-प्रधान कार्यक्रम के रूप में हुआ, जिसमें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को सम्मानों से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने 2023 के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार श्री मोहनलाल को प्रदान किया।
(यह विवरण राष्ट्रपति भवन की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है)
इस लेख में मैं संक्षिप्त पृष्ठभूमि, समारोह के मुख्य अंश, राष्ट्रपति का भाषण, प्रमुख पुरस्कार विजेताओं की जानकारी और राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों का महत्त्व — समस्त जानकारी सरकारी स्रोतों और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स से संकलित — प्रस्तुत करूँगा।
पृष्ठभूमि एवं महत्त्व
राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार — परिचय
राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा की श्रेष्ठतम कृतियों, कलाकारों व तकनीशियनों को मान्यता देने वाले प्रतिष्ठित पुरस्कार हैं। इन्हें चुनाव प्रक्रिया द्वारा न्यायपूर्ण तरीके से चुना जाता है और पुरस्कारों का वितरण राज्य स्तर से लेकर केंद्रीय स्तर तक विस्तृत जूरी प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। 71वीं राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार उन फिल्मों, अभिनेताओं और तकनीशियनों को सम्मानित करते हैं जो वर्ष 2023 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके थे।
विजेताओं की घोषणा पहले ही (1 अगस्त 2025) की गई थी। इसके बाद 23 सितम्बर 2025 को सरकार एवं राष्ट्रपति द्वारा उनकी सम्मान-प्राप्ति की रस्म पूरी की गई।
फ़िल्मों के क्षेत्र में यह पुरस्कार — न केवल कला और तकनीक को प्रोत्साहन देते हैं — बल्कि यह समाज, संस्कृति और विविध भारतीय समाज की आवाज़ को प्रतिष्ठा दिलाते हैं।
समारोह का स्वरूप और आयोजन
समय, स्थान और आयोजन
– कार्यक्रम 23 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली में विज्ञान भवन (Vigyan Bhavan) में आयोजित किया गया था।
– इसे राष्ट्रपति भवन और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की भागीदारी से समन्वित किया गया।
– अन्य गणमान्य अतिथि, फ़िल्म जगत की प्रतिभाएँ, जूरी सदस्य और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।
समारोह की रूपरेखा
- उद्घाटन तथा स्वागत
- राष्ट्रपति का अभिभाषण
- मुख्य पुरस्कार विजेताओं को आमंत्रित करना
- दादा साहेब फाल्के पुरस्कार समारोह
- संवाद एवं मीडिया स्पर्श (फोटो, प्रेस वार्ता आदि)
इस प्रकार, यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि भारतीय सिनेमा के विस्तार, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का उत्सव था।
राष्ट्रपति मुर्मू का अभिभाषण — मुख्य बिंदु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। नीचे मैं उन मुख्य अंशों को सारांश एवं उद्धरणों सहित प्रस्तुत कर रहा हूँ।
बधाई एवं अभिनंदन
- उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई दी।
- विशेष रूप से श्री मोहनलाल को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार देने के लिए उन्हें बधाई दी।
- उन्होंने कहा कि मोहनलाल जी ने "सबसे कोमल से लेकर सबसे कठोर भावनाएँ" सहजता से निभाई हैं, जिससे वे “Complete Actor” की छवि में खरे उतरे हैं।
महिलाओं के विषय पर संवेदनशीलता
– राष्ट्रपति जी ने यह खुशी जताई कि इस बार पुरस्कारों में महिला-केंद्रित फिल्में न केवल बनाई गई हैं बल्कि सम्मान भी पा रही हैं। President of India
– उन्होंने कहा कि समाज में महिलाएं गरीबी, पूर्वाग्रह या सामाजिक बाधाओं के साथ संघर्ष करती हैं। ये फिल्मों के विषय हो सकते हैं — माताओं की भूमिका, महिलाओं का एकजुट होना, आवाज़ उठाना आदि। President of India
– इस प्रकार की फिल्मों को (जो सामाजिक सरोकारों को उठाती हों) वे विशेष रूप से सराहती हैं।
भारतीय सिनेमा और विविधता
– राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री भारतीय सिनेमा है, जो लोकतंत्र एवं विविधता को प्रतिबिंबित करती है।
– उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय सिनेमा — जैसे भारतीय साहित्य — विभिन्न भाषाओं, बोलियों, क्षेत्रीय संदर्भों में विकसित हो रहा है।
– उनके अनुसार हमारी फिल्में स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर जुड़ी हैं।
सिनेमा का सामाजिक दायित्व
- राष्ट्रपति ने जोर दिया कि फ़िल्म केवल उद्योग नहीं है— यह समाज को संवेदनशील बनाने, जागरूकता बढ़ाने और नैतिक मूल्यों को संचारित करने का माध्यम भी है।
“लोकप्रियता एक अच्छी बात हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक हित, विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए, और भी बेहतर है।”
– उन्होंने फ़िल्मकों से आग्रह किया कि भारतीय फिल्मों को अधिक स्वीकार्यता मिले, उनकी लोकप्रियता बढ़े और वे ग्लोबल स्तर पर भी पहचान पाएं।
ये बिंदु यह स्पष्ट करते हैं कि राष्ट्रपति मुर्मू ने इस कार्यक्रम को केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि साफ संदेश देना चाहा कि सिनेमा को सामाजिक दिशा में उपयोग किया जाना चाहिए।
प्रमुख पुरस्कार विजेता एवं उनकी उपलब्धियाँ



नीचे कुछ मुख्य पुरस्कार विजेताओं एवं उनके योगदान की जानकारी दी जा रही है, जैसा कि उपलब्ध सरकारी और मीडिया स्रोतों में वर्णित है।
| पुरस्कार / श्रेणी | विजेता / फ़िल्म | विशेष विवरण / टिप्पणी |
|---|---|---|
| दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2023) | श्री मोहनलाल | भारतीय सिनेमा में आजीवन योगदान के लिए। राष्ट्रपति का सम्मान। |
| श्रेष्ठ अभिनेतृ (Leading Actress) | रानी मुखर्जी | फ़िल्म Mrs Chatterjee vs Norway के लिए; यह उनका पहला राष्ट्रीय पुरस्कार है। |
| श्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) | शाह रुख खान और विक्रांत Massey (साझा) | SRK को Jawan से, Vikrant Massey को 12th Fail से चयन। |
| श्रेष्ठ फीचर फ़िल्म | 12th Fail | यह फ़िल्म कई अन्य पुरस्कारों में भी विजेता रही। |
| श्रेष्ठ लोकप्रिय फ़िल्म (खुली मनोरंजन) | Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani | इसे “popular film for wholesome entertainment” श्रेणी में चुना गया। |
| श्रेष्ठ गैर‑फ़ीचर फ़िल्म | Flowering Man | इस श्रेणी में चयनित शीर्ष फ़िल्म। |
| अन्य श्रेणियाँ जैसे: निर्देशन, साउंड, संपादन आदि | विविध विजेता | उदाहरण: शिल्पा राव (Playback Singer), GV Prakash Kumar (Music Direction), Pookalam (Editing) आदि। |
इनमें से कुछ मीडिया रिपोर्टों ने पुरस्कार राशि (Prize Money) व अन्य विवरण भी प्रकाशित किए हैं:
- श्रेणी “Best Actor / Actress” के लिए पुरस्कार राशि लगभग ₹2 लाख रखी गई, जिसे साझा होने पर विभाजित किया गया। उदाहरण के लिए, SRK और Vikrant Massey को ₹1 लाख-1 लाख दिया गया।
- रानी मुखर्जी को इस श्रेणी में पुरस्कार राशि पूरी मिली (₹2 लाख) साथ ही पदक और प्रमाण पत्र। Indiatimes
ये पुरस्कार एवं विवरण भारतीय सिनेमा की बहुभाषीयता और तकनीकी–कलात्मक विविधता को दर्शाते हैं।
आयोजन के अन्य दिलचस्प पहलू
जूरी प्रणाली
“71वीं राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों” के लिए जूरी प्रणाली जटिल और विस्तृत रही है — राज्य/क्षेत्रीय स्तर से सदस्य विवरण, समीक्षा प्रक्रिया आदि। News on Air+2Wikipedia+2
उदाहरण स्वरूप, जूरी (Non‑Feature Film) की अध्यक्षता P. शेषाद्री ने की, जिन्होंने Flowering Man को सर्वश्रेष्ठ गैर‑फ़ीचर फ़िल्म घोषित किया। News on Air
मीडिया और जनसम्पर्क
समारोह के दौरान मीडिया को आमंत्रित किया गया था, प्रेस वार्ता एवं फोटो-सत्र हुए। कई मीडिया आउटलेट्स और राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने इस आयोजन का विस्तृत कवरेज किया।
समारोह की सांस्कृतिक भूमिका
– यह कार्यक्रम न केवल फ़िल्म जगत को प्रेरणा देता है, बल्कि समाज को यह बताता है कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्टता को कैसे पहचान मिलती है।
– साथ ही, यह पुरस्कार समारोह नवोदित कलाकारों, तकनीशियनों और नए विषयों को प्रोत्साहित करने में सहायक है।
– इस समारोह ने विशेष रूप से महिलाओं, सामाजिक मुद्दों और विविध भारतीय सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को केन्द्र में रखा है — जो कला एवं संस्कृति की प्रेरणा बनती है।
निष्कर्ष एवं विचार
इस 71वीं राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह से हमें यह स्पष्ट संदेश मिलता है:
-
कला में संवेदना का महत्व – राष्ट्रपति ने यह विशेष ज़ोर दिया कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन न हों, बल्कि समाज को संवेदनशील बनाएं और सकारात्मक संदेश दें।
-
अधिकार और समानता – महिला-केंद्रित कहानियों को सम्मान देना यह संकेत है कि पटकथाकारों एवं निर्देशकों को महिलाओं की कहानियों को सामने लाने में उत्साह मिल रहा है।
-
भाषाई एवं क्षेत्रीय विविधता – भारत में फिल्मों की विविध भाषाओं में होना, स्थानीय संदर्भों को जगह देना और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान पाना — यह हमारी सिनेमा की विशेषता है।
-
जीवनपर्यन्त योगदान का सम्मान – दादा साहेब फाल्के पुरस्कार जैसी प्रतिष्ठा यह याद दिलाती है कि किसी कलाकार या तकनीशियन का जीवनभर का योगदान किस प्रकार स्मरणीय हो सकता है।
-
प्रेरणा एवं प्रोत्साहन – यह समारोह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिससे नए प्रतिभागी, तकनीशियन एवं कहानीकार आगे बढ़ने का साहस पाते हैं।

.jpeg)

No comments:
Post a Comment